हिन्दी दिवस के अवसर पर साहित्य समागम भारत की ओर से विचार गोष्ठी सह कवि सम्मेलन का किया गया आयोजन



हिन्दी दिवस के अवसर पर साहित्य समागम भारत की ओर से विचार गोष्ठी सह कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता प्रो तारा चरण खावड़े ने किया। साहित्यकारों को सम्बोधित करते हुए श्री खवाड़े ने कहा कि हिन्दी को राजभाषा के तौर पर हिन्दी को विशिष्ट रूप देने की आवश्यकता थी लेकिन राजनीति के कारण हिंदी दिवस आज महज औपचारिकता बन कर रह गया है। गोरखपुर से साहित्यकार विशु तिवारी ने कहा हिन्दी के लिए सरकार अलग से एक हिन्दी आयोग का गठन करें जो हिन्दी पर अनुसंधान करें हिन्दी को सशक्त करें। साहित्य समागम भारत के संयोजक रवि शंकर साह ने कहा कि हिन्दी हमारी मातृभाषा है  इसे माँ के समान ही प्रेम करने की आवश्यकता है तभी हिन्दी को वह सम्मान मिल पायेगा जिसकी वह हकदार हैं। साहित्यकार अनिल कुमार झा ने कहा कि हिन्दी एक सशक्त भाषा है।समृद्ध भाषा है।और आज मजबूत स्तिथि में है। युवा साहित्यकार उमाशंकर राव उरेन्दु ने कहा कि राजनीति के कारण हिन्दी को दबाया जा रहा है।लोग अंग्रेजी के पीछे भाग रहे हैं। फाल्गुनी मरीक कुशवाहा ने कहा कि हिन्दी है पहचान हमारी कब बनेगी यह वैश्विक भाषा। सोनाली भारती ने कविता के माध्यम से आजादी का मतलब मनमानीपन कभी नहीं हो।इस बात पर जोर दिया। कार्यक्रम में अनीता चौधरी,शिप्रा झा,पुनीत बरई, बबली कुमारी, सहित बिहार, बंगाल, झारखंड, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ के साहित्यकारों ने बढ़चढ़ कर भाग लिया।धन्यवाद ज्ञापनसाहित्य समागम के संयोजक रवि शंकर साह ने किया।

No comments