सनातन फाउंडेशन के प्रयास से संतोष को मिला नया जीवन



सनातन फाउंडेशन समाजसेवा के क्षेत्र में लगातार अपनी अग्रणी भूमिका निभाता रहा है। हालिया वाकया रोहिणी(देवघर) निवासी संतोष कुमार का है। जब सारी विकट परिस्थितियां संतोष के सामने मुह वाये खड़ी थी तब सनातन फाउंडेशन ने अपने समाज सेवा की सच्ची भूमिका निभाते हुए, अपने कार्य क्षेत्र देवघर से भी बाहर निकल रांची के अस्पताल में संतोष को रक्त उपलब्ध कराया।


ज्ञात हो की रोहिणी ग्राम के संतोष कुमार को न जाने पेट के आंत की कौन सी बीमारी ने अपने जकड में कैद किया की उसका इलाज़  देवघर सदर अस्पताल में नहीं हो पाया और बेहतर चिकित्सा के लिए उसे देवघर से धनबाद और फिर धनबाद से रांची रेफर कर दिया गया। लॉक डाउन में दो जून के खाने को मोहताज संतोष कुछ समाजसेवकों के सहारे रांची तो पहुंच गया जहाँ उसके पेट के ऑपरेशन के बाद,  शरीर में खून की भारी कमी हो गयी और डॉक्टरों ने खून के व्यवस्था की जिम्मेवारी संतोष की पत्नी को सौंप दिया।

परदेश में न कोई दोस्त ना रिश्तेदार........। अकेली महिला खून की व्यवस्था कैसे करे? लेकिन यह खबर जैसे ही सनातन फाउंडेशन के विजय प्रताप सनातन को मिली तो वो बेचैन हो उठे। लेकिन, सीमाओं को लांघना आसान न था।

लेकिन कहते हैं की अगर भावना सच्ची हो मुश्किल वक़्त में भी कोई ना कोई रास्ता निकल ही आता है। इस विषम परिस्थिति में विजय प्रताप सनातन ने राकेश रंजन(राष्ट्रिय कार्यसमिति सदस्य, इंडियन रोटी बैंक) से संपर्क कर उन्हें ए बी पोजेटिव ब्लड उपलब्ध करने का आग्रह किया। राकेश रंजन भी खोजते खाजते अपने दोस्त टिंकू महतो के पास पहुँच गए जिनका ब्लड ग्रुप संतोष से मेल खा गया। 

तत्पश्चात टिंकू महतो जैसे रक्तवीर के रक्तदान के सहयोग से संतोष की जान बच गयी और अभी उसकी हालात खतरे से बाहर बताई जा रही है।

सनातन फाउंडेशन के अध्यक्ष विजय प्रताप सनातन बताते हैं की पहले देवघर में रक्तवीरों के पास "डोनर कार्ड" होता था लेकिन फिलहाल स्वास्थ्य विभाग/ प्रशासन द्वारा डोनर कार्ड निर्गत नहीं किया जा रहा है जिसके कारण देवघर से बाहर गए मरीजों को देवघरिया रक्तवीर रक्त उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं। लेकिन फिर भी रांची के ही टिंकू महतो के सेवाभाव के कारण संतोष की जान बच गयी।

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