राजमहल की पहाड़ी में नए प्रकार के जीवाश्म की हुई खोज



साहिबगंज संवाददाता:-जिला से 28 किलोमीटर दूर तालझारी के दूधकोल पहाड़ पर एक अद्भुत पत्थर देख कर ग्रामीणों में उस पत्थर को लेकर एक अजीब उत्साह व आस्था का केंद्र बन गया है।हालांकि उस पत्थर की चमक को देखकर सभी प्रभावित हो रहे हैं उस पत्थर में एक शिवलिंग और एक देवी की प्रतिमा सचमुच में नजर आ रही है. ग्रामीणों ने उसे पूजा अर्चना करने में कोई भी कमी नहीं छोड़ रही है देखते ही देखते पूरे इलाके के लोग उससे दूर पहाड़ी क्षेत्र में कुछ अनोखे पत्थर को दर्शन करने के लिए आने लगे हैं ग्रामीणों का कहना है कि अगर ग्रामीणों का मानना है कि प्रशासन की मदद से वह लोग क्षेत्र में एक मंदिर का विकास करना चाहते हैं।भूवैज्ञानिक डॉ रणजीत कुमार सिंह के अनुसार राजमहल की पहाड़ी भूवैज्ञानिक व वैज्ञानिक व आम लोगों के लिए तीर्थ स्थल से कम नहीं है। काफी मात्रा में शोध कार्य के प्रकृतिक प्रयोगशाला मौजूद है।यह स्थान से प्रचुर मात्रा में फॉसिल्स प्लांट्स का बिखरे पड़े हैं।यह उपरगोंड़वान फ़्लोरा आयु का जीवश्म फॉसिल्स  दूधकोल तालझारी में पहली बार देखा गया है।यह  पतिलोफाइल्लुम फ़्लोरा150 -200 मिलियंस इयर्स ओल्ड भू वैज्ञानिकों के अनुसार यह जगह 1तीर्थ स्थल से कम नहीं है।शोध के दृष्टिकोण से क्षेत्र एक बहुत बड़ा संपत्ति के रूप में सहायता कर सकता है।यह जगह 1 तीर्थ स्थल से कम नहीं शोध के दृष्टिकोण से क्षेत्र एक बहुत बड़ा संपत्ति के रूप में सहायता कर सकता है क्षेत्र के विकास में क्षेत्र में एक बहुत बड़ा रोजगार का अवसर उत्पन्न हो सकता है। स्वालंबन स्वरोजगार व शोध के लिए बहुत बड़ा राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दे सकते हैं।जियो टूरिज्म के दृष्टिकोण से यह क्षेत्र बहुत ही प्रभावशाली बन सकता है और साथ-साथ एक रोजगार का एक बहुत ही बड़ा अवसर प्रदान कर सकता है।वही डॉ रणजीत कुमार सिंह ने कहा कि जब मैं दुधकोल पहाड़ पर गया तो देखा तो सच मे आज भी विज्ञान पर भारी है आस्था,काफी संख्या में आदिवासी समाज के लोग पूजा अर्चना कर रहे है।हमें लगता है कि आस्था पर कोई ठेस नहीं पहुंचा चाहिए साथ ही वैज्ञानिक दृष्टिकोण का भी सम्मान होना चाहिए।


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