मधुपुर मे केरोसिन की कालाबाजारी में बड़े-बड़ों की मिलीभगत



मधुपुर कोटे के केरोसिन की कालाबाजारी में बड़े स्तर पर खेल शुरू है। नेटवर्क में डीलर, कोटेदार के साथ विभाग के कर्मी भी शामिल हैं। आयल कंपनियों से केरोसिन लेकर डीलर इसे सीधे बाजार में बेच दे रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि तेल का काला कारोबार कई सालों से फ ल-फ ूल रहा था। इसके अलावा क्षेत्र के कई ऐसे कोटेदार भी हैं जो हर महीने तेल की आपूर्ति तो यहां से उठाते हैं लेकिन उसे गरीब के परिवार तक पहुंचाने से पहले ही बाहर ही सौदा कर देते हैं। सूत्रोें का दावा है कि क्षेत्रीय तेल डिपो के लोगों की सेटिंग विभागीय जिलास्तर अधिकारियों से भी होती है। मालूम होकि  जिले के मधुपुर अनुमंडल मुख्यालय में इन दिनों मिलावटी किरासन तेल की बिक्री धड़ल्ले पर हो रही है । जिसमें मधुपुर शहर के बड़े रसूखदार शामिल हैं। उनकी पहुंची प्रशासन से लेकर शासन तक है जिसके बल पर वे बेधड़क मधुपुर अनुमंडल क्षेत्र के सभी प्रखंडों में मिलावटी किरासन तेल बिक्री करवा रहे हैं। इनकी तेल की गुणवत्ता पर आम जनता सवाल उठाने लगी है। मधुपुर किरासन तेल डीलर का अनुज्ञप्ति समाप्त है उसके बाद भी मधुपुर में प्रचुर मात्रा में किरासन तेल कालाबाजारी होना अपने आप में एक सवाल है। प्रायः डीजल एवं पेट्रोल के खुदरा विक्रेता मधुपुर के डीलर के पास से किरासन तेल खरीद कर डीजल- पेट्रोल में मिलाकर बिक्री किया करते हैं। इस दिशा में जिला प्रशासन की कोई नजर आज तक नहीं जा सकी है। वही रसूखदार व्यक्ति मालामाल हो रहे हैं। कुछ इस तरह होता है खेल दरअसल, तेल कंपनियां राज्य सरकार द्वारा त्रैमासिक डीलर कोटा लिस्ट के अनुसार केरोसिन देती हैं। इसके लिए आवंटित डिपो पर डीलर अपने कोटे के अनुसार इंडेन्ट तैयार कराता है और अपने अनुबंधित ट्रांसपेार्टर की गाड़ी का नंबर तेल कंपनी डिपो को उपलब्ध कराते हैं। निर्धारित तिथि पर अधिकृत तेल टैंकर डिपो से केरोसिन लेकर जैसे ही निकलता है, ऑटोमेटिक सिस्टम द्वारा डीलर को पूरा विवरण एसएमएस से उपलब्ध हो जाता है। डीलर इस केरोसिन को पूर्ति अधिकारी द्वारा प्राधिकृत अधिकारी की उपस्थिति में अपने स्टॉक में एंट्री करते हैं। सभी संबंधित स्टॉक रजिस्टर पर हस्ताक्षर होते हैं। इसके बाद जिला पूर्ति अधिकारी द्वारा उपलब्ध कराई गई सूची के अनुसार यह डीलर अपने क्षेत्र के कोटेदारों को निर्धारित मात्रा में केरोसिन निर्गत कर देते हैं।18 का तेल बाजार में 50 का बिकता डीलरों को डिपो से केरोसिन 18.10 रुपये प्रति लीटर मिलता है। वह कोटेदार को 18.94 रुपये प्रति लीटर की दर से उपलब्ध कराता है।  खुले बाजार में केरोसिन की कीमत लगभग 50 रुपये प्रति लीटर है। दाम में इतना बड़ा अंतर इस सिस्टम में सेंध लगाकर केरोसिन को ऊंचे दामों पर बेचने का मुख्य कारण है। तीन स्तरों पर डीलर करते हैं गड़बड़ियां डीलर तीन स्तरों पर गड़बड़ियां कर रहे हैं। पहला उन्हें तेल कंपनियों से मिलने वाले केरोसिन को 40 से 45 रुपये प्रति लीटर की दर से पूरा का पूरा तेल बेच रहे हैं। दूसरा फर्जी तरीके से इस कोटे को अपने स्टॉक में दर्शाते हैं। इसमें संबंधित सक्षम अधिकारियों के हस्ताक्षर प्राप्त करवाते हैं। तीसरा डीलर से जुड़े कोटेदारों को उनके कोटे के एक हिस्से की पूर्ति और शेष के बदले 30 से 35 रुपये प्रति लीटर की दर से भुगतान करते हैं। जामताड़ा डीलर के मिली भगत से ही यह सब संभव है  अधिकारी मे कही ना सर्पोट मे है इसी वजह से किरोसिन कालाबाजारी  जौर सौर से हो रहा है

No comments