मधुपुर राहुल अध्ययन केन्द्र में राष्टीय कवि दिनकर की 112 वीं जयन्ती मनायी गयी



मधुपुर बुधवार को राहुल अध्ययन केन्द्र में राष्टीय कवि दिनकर की 112वीं जयंती मनाया गया।मौके पर उनकी तस्वीर पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किया गया। मौके पर केन्द्र के संरक्षक कलमकार धनंजय प्रसाद ने विस्तार पूर्वक चर्चा करते हुये कहा कि रामधारी सिह दिनकर की हिन्दी काव्यजगत मे एक पहचान है। दिनकर विद्रोही स्वभाव के कवि थे। उन्होनें कविता के माध्यम से देश के नौजवानों की , किसानों की , मजदूरों की , वंचितों की व दलितों की बात की है । उनकी नजर सामाजिक , आर्थिक असमानता पर भी जाती है । गहरे विभेद के परतो को वह देखते है और उनपर हामले भी करते है । वह राष्ट चेतना को अपने साहित्य से बार - बार झकझोरने की कोशिश भी करते है । उनकी लोकप्रिय काव्यकृति रश्मिरथी हो या गद्य पुस्तक संस्कृति के चार अध्याय , वह अपने चिंतन में व्यग्र सामाजिक तत्वों को रखते है । उन्होने कविता के अलावे संस्मरण , यात्रा वृतांत , आलोचना , निबंधं ,बौध कथाएं लिखें । आज अब तक का सबसे क्रूरत्म और आराजक है । आज स्थिति , परिस्थिति व व्यवस्था आवाम के प्रतिकुल है । आज इंसान पर चौतरफा वार हो रहे है । कही से भी बेहतरी की उम्मीद नजर नहीं आ रही है । लोग हताशा और निराशा के शिकार होकर आत्महत्या करने को मजबुर हो रहे है ।  ऐसे समय में दिनकर जैसे कवि का जयन्ती के अवसर पर याद आना लाजिमी है। इसके अलावे अन्य लोगों ने आंनलाइन विचार व्यक्त किये व श्रद्धासुमन अर्पित किये!

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