WHO के मुताबिक कोरोना संक्रमण से मरने वाले व्यक्ति की डेड बॉडी के अंतिम संस्कार से खतरा नहीं

ब्यूरो रिपोर्ट।देवघर कोरोना संक्रमण को लेकर सिविल सर्जन डाॅ0 विजय कुमार द्वारा जानकारी दी गयी है कि कोरोना संक्रमण से मृत्यु के पश्चात शव के अंतिम संस्कार से वायरस नहीं फैलता है। चूंकि कोविड-19 एक नई बीमारी है और वैज्ञानिकों के पास फिलहाल इसकी सीमित समझ है इसलिए महामारी से संबंधित जो भी जानकारी प्राप्त हो रही है उसी के आधार पर गाईडलाईन तैयार की जाती है। वर्तमान में प्रायः ऐसा देखा जाता है कि कोरोना संक्रमण से  मृत्यु के पश्चात परिजनों द्वारा शव लेने में डर एवं शव के अंतिम संस्कार को लेकर कई तरह की समस्याएँ उत्पन्न होती रहती है, जबकि अगर डेडबॉडी को इलेक्ट्रिक मशीन, लकड़ी या सीएनजी से जलाया जाता है तो जलते समय आग की तापमान 800 से 1000 डिग्री सेल्सियस होगा, ऐसे में कोई भी वायरस जीवित नहीं रहेगा। इसके अलावा अगर डेडबॉडी को दफनाने की जगह और पीने के पानी के स्त्रोत में 30 मीटर या उससे अधिक की दूरी है तो डेडबाॅडी को दफनाने पर कोई खतरा नहीं होगा। इसके अलावा सिविल सर्जन द्वारा जानकारी दी गयी कि कोरोना संक्रमित मरीज के द्वारा खाँसने या छींकने पर उनके ड्राॅपलेट्स के सम्पर्क में आने पर कोरोना संक्रमण के प्रसार का खतरा बना रहता है परन्तु किसी कोरोना संक्रमित मरीज के मृत्यु हो जाने के पश्चात उसके शव के अंतिम संस्कार करने से कोरोना संक्रमण फैलने का खतरा नहीं है। इसलिए लोग स्वास्थ्य सुरक्षा मानकों का उपयोग करते हुए निर्भिक होकर कोरोना संक्रमित व्यक्ति के शव का अंतिम संस्कार कर सकते हैं।

 अंत्योष्टि या दफन करने से संबंधित गाईडलाइन

अंतिम संस्कार की जगह को और कब्रिस्तान को संवेदनशील जगह मानें। भीड़ को जमा ना होने दें, ताकि कोरोना वायरस के खतरे को कम रखा जा सके। परिवार के अनुरोध पर मेडिकल स्टाफ के लोग अंतिम दर्शन के लिए मृतक का चेहरा प्लास्टिक बैग खोलकर दिखा सकते हैं, पर इसके लिए भी सारी सावधानियाँ बरती जाएं। अंतिम संस्कार से जुड़ीं सिर्फ उन्हीं धार्मिक क्रियाओं की अनुमति होगी जिनमें शव को छुआ न जाता हो। शव को नहलाने, चूमने, गले लगाने या उसके करीब जाने की अनुमति नहीं होगी। शव दहन से उठने वाली राख से कोई खतरा नहीं है। अंतिम क्रियाओं के लिए मानव-भस्म को एकत्र करने में कोई खतरा नहीं है।

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