समाजसेवी डॉ शक्तिपद साधु के निधन पर क्षेत्र में शोक का माहौल

संवाददाता , नाला (जामताड़ा) -- अब नहीं रहे दलित एवं पिछड़ों के मसीहा डॉ० शक्तिपद साधु । उनका निधन नाला स्थित आवास में करीब 1:00 बजे हो गई । मालूम हो कि उनका जन्म 2 नवंबर 1933 को हुआ। आज उनके निधन से क्षेत्र के हर तबके के लोगों में शोक का माहौल है । डॉ० शक्तिपद साधु लोगों के सेवा में सेवारत थे । सूरज को दिया दिखाना और डॉक्टर साधु के बारे में चंद शब्दों में लिखना अथवा प्रकाश करना बराबर होगा । 85 वर्ष की उम्र में भी डॉक्टर साधु खासकर गरीब गुरबों  को चिकित्सा सेवा बड़े ही सहजता पूर्वक प्रदान करते थे । यही इनकी त्याग और उदारचितता का परिचय है । मालूम हो कि डॉक्टर साधु एक संपन्न परिवार से बिलॉन्ग करते थे । उसके बावजूद भी गरीबों के हित और सेवा को ध्यान में रखकर खुद लड़खड़ाते हुए दूसरों का अनवरत करते रहते थे । मालूम हो कि उनका जन्म नाला प्रखंड के कालीपहाड़ी पंचायत के कालीपहाड़ी में हुआ । उनकी प्रारंभिक शिक्षा कालीपहाड़ी लोअर प्राथमिक विद्यालय में हुई । उसके बाद पश्चिम बंगाल की गोरांडी रामकृष्ण सोयबालीनी हाई स्कूल में मैट्रिक तक अध्ययन की । तत्पश्चात उन्होंने कलकत्ता विद्यासागर से स्नातक की उपाधि प्राप्त की । उसके बाद उन्होंने एनआरएस मेडिकल कॉलेज कलकत्ता से एमबीबीएस की डिग्री पास की । उसके बाद संभूनाथ हॉस्पिटल कलकत्ता से डीजीओ की डिग्री प्राप्त की । इतनी बड़ी डिग्री हासिल करने के बावजूद डॉक्टर साधु के मन में गरीबों की सेवा भाव ने उन्हें पुनः उसी बीहड़ पिछड़े क्षेत्र में ला खड़ा किया ।अक्टूबर 1960 से इन्होंने नाला क्षेत्र में चिकित्सा सेवा प्रारंभ की । हजारों गरीब पिछड़े नि:शक्तों की सेवा की । इस क्षेत्र में मानवीय मूल्यों की महत्ता दी । इनकी माता- काशीवाला साधु , पिता - बलराम साधु के आशीर्वाद से इन्होंने समाज में अमीट छाप बनाई । समाज में कोई भी कार्यक्रम होने पर उन्हें मुख्य अतिथि के तौर पर बुलाया जाता था ।उनके कर कमलों द्वारा कार्यक्रम का उद्घाटन कराकर लोग अपने आप को सौभाग्यवान महसूस करते थे । परंतु पिछले कई साल से उनकी शारीरिक स्थिति ठीक नहीं रहने के कारण कार्यक्रम में वे नहीं जा पाते थे । मालूम हो कि ढलता उम्र के बावजूद लोगों की प्रेरणा का स्रोत बने हुए थे । इतना ही नहीं चिकित्सा क्षेत्र के अलावे शिक्षा के क्षेत्र में भी डॉक्टर साधु की योगदान अतुलनीय रही ।इनके नेतृत्व में 1963 में नाला उच्च विद्यालय की स्थापना हुई । सचिव के पद संभालते हुए इन्होंने 1982 में नाला इंटर कॉलेज की स्थापना की । 1987 में इन्हीं की संरक्षण में बिहार सरकार ने कॉलेज को स्वीकृति दी । आज इस उच्च विद्यालय तथा कॉलेज अपनी प्रतिभा का बखान करते नहीं अघाते ।81 वर्ष की अवस्था में भी खुद लड़खड़ाते हुए लोगों को चिकित्सीय तथा अन्य सेवाएं प्रदान करना एक महामानव का ही परिचय है । उनके निधन से क्षेत्र में शोक का माहौल है ।

नाला इंटर कॉलेज के प्राचार्य भानुरंजन ठाकुर , डिग्री कॉलेज के प्राचार्य गुणमय दास , प्रो० संजय ठाकुर , डॉ० राधेश्याम मंडल ,डॉ० नदियानंद मंडल ,  रंजीत डोकानिया , सुब्रत कुमार चौधरी , समर माजी , पंकज झा , गणेश चन्द्र मित्र , गुलसन अलि आदि सबों ने शोक संवेदना व्यक्त की !

नाला जामताड़ा से मधुमिता कुमारी की रिपोर्ट।

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