भाजपा के वरिष्ठ नेता राजेंद्र प्रसाद गुप्ता का हृदय गति रुक जाने से हुआ निधन

ब्यूरो रिपोर्ट।* *राजेंद्र बाबू का 1967 से राजनीतिक क्षेत्र में पदार्पण हुआ 53 वर्ष तक  ईमानदारी के साथ पार्टी का सेवा करते रहे!*                                   *79 वर्ष के बाद उसने जिंदगी से हार गई! उनकी मौत से पार्टी कार्यकर्ताओं में गमगीन का माहौल!* 

 मधुपुर  18 अगस्त : मधुपुर भाजपा परिवार का स्तब्ध वरिष्ठ नेता राजेंद्र प्रसाद गुप्ता का हिर्दय गति रुक जाने से निधन हो गया।53 वर्ष तक ईमानदारी के साथ पार्टी का सेवा करते आ रहे थे। राजेंद्र प्रसाद गुप्ता 79 वर्ष के थे उनके आकस्मित निधन से गहरा आघात लगा है। वर्तमान समय से लेकर भूतकाल तक पार्टी में इनका योगदान स्मरणीय रहा है।कभी किसी पद की लालसा किये बिना और निस्वार्थ सेवाभाव उनके व्यक्तित्व की व्याख्या करता है।भारतीय जनसंघ काल में 1967 से इन्होंने राजनेतिक क्षेत्र में इनका पदार्पण हुआ।लोग इनको प्यार से राजेंद्र कव्वाल कहते है।1974 जेपी आंदोलन में इनकी भागीदारी रही।जब 

1980 में डॉ अजीत कुमार बनर्जी के हारने के बाद भाजपा में निराशा के दौर में इन्होंने पार्टी को उभारने में महत्वपूर्ण भुमका निभाई।लगातार इनकी तपस्या का परिणाम भाजपा मधुपुर विधानसभा में 25 साल के बाद जीत हासिल की।1998 से 2002 तक पूर्व सांसद जगदम्बी प्रसाद यादव के प्रतिनिधि के रूप में आसानसोल रेल मंडल के डीआरयूसीसी के सदस्य रहे।पार्टी के द्वारा इनको समय समय पर अनेक दायित्व दिया गया जिसको इन्होंने बखूबी निभाया। उन्होंने कई बार पार्टी के सदस्यता प्रभारी की भूमिका निभाया।नये नये कार्यर्कताओ को पार्टी से जोड़ने में इनकी भूमिका रहती थी।

1975  में आपातकाल लगने के बाद भूमिगत होकर पार्टी के लिये कार्य करते रहे।दीनदयाल डालमिया,जनुमा तिवारी,मिथलेश सिंह के संपर्क में रहकर संघठन में इनको भूमिका सराहनीय रही।इनको भाजपा मधुपुर के भीष्म पितामह कहा जाता है।भजपा नगर कमिटि के फ़ो बार निर्बिरिध अध्यक्ष चुने गए।पार्टी में इनकी भूमिका को देखते इनको पिता टूल अभिभवक का दर्जा दिया और पार्टी के कार्यकर्ताओं ने भीष्म पितामह का दर्जा दिया।जिला संघटन में इन्हें जिला मन्तरी का दैतव्य निभ्या।इनकी आकस्मिक निधन मधुपुर भाजपा संघटन को अपूरणीय क्षति है।इनके पार्टी में भूमिका को देखते हुए पूर्व मंत्री राज पलिवार ने इनको झारखण्ड के श्रम विभाग के पर्यवेक्षक की जिम्मेदारी दी।

गणिनाथ परिवार में वो हमेशा संरक्षक की भूमिका में रहे!।

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