भाजपा नेता ज्ञान रंजन सिन्हा ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर साधा निशाना, कहा कोविड से बचाव में सरकार पूरी तरह होरही विफल







राज्य सरकार कोविड पॉजिटिव मरीज के इलाज करने में पूरी तरह विफल है। :- ज्ञानरंजन सिन्हा 

धनबाद भाजपा के ग्रामीण जिलाध्यक्ष ज्ञान रंजन सिन्हा द्वारा हरदेव राम स्मृति धर्मशाला,गोविंदपुर में एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। जिसमें उन्होंने कहा कि धनबाद ज़िले के कोविड पॉजिटिव मरीज के इलाज के लिए आज के दिन तक एकमात्र अस्पताल सेंट्रल हॉस्पिटल,धनबाद की स्थिति नरक से भी बदतर है।उन्होंने कहा कि पिछले दिनों ज़िला प्रशासन द्वारा जन प्रतिनिधियों की बैठक में बताया गया कि हमलोगों के लिए जो चुनौती है वह यह है कि मौत के कारण को पता लगाना,संक्रमण के प्रभाव को रोकना,जागरूकता बढ़ाना, सरकारी निर्देश का सख्ती से पालन करना और तेजी से बढ़ रहे मौतों को रोकना।हम आपके माध्यम से राज्य सरकार और प्रशासन से पूछना चाहते हैं कि इतनी कुव्यवस्था के बीच सरकार कैसे मौतों को रोकना चाहती है?
वार्ड में डॉक्टर का विजिट नही होता है।मरीज की स्थिति गंभीर होने के बाद कॉल पर भी डॉक्टर मरीज को देखने नही आते है।पूरे अस्पताल को सही तरीके से चलाने की जिम्मेवार लिए नियुक्त नोडल ऑफिसर(डॉक्टर) मरीजों की देखने या व्यवस्था को देखने की जरूरत नही समझते है।जहाँ तक नर्स की बात है वो सुबह-शाम मरीजों को दवा देने के अलावे झांकने भी नही जाती है।साफ-सफाई की जहाँ तक बात है कि पिछले एक सप्ताह से अधिक समय से वार्ड में सफाई नही हुआ है।वार्ड के अंदर और बाहर कचरे का ढेर लगा हुआ है।शौचालय भी  60-70 मरीज में मात्र 4ही है जिसकी साफ-सफाई कभी भी समय पर नही होती है।पूरे सिस्टम में मैन पावर का घोर अभाव है।और इसका नतीजा है कि जिन मरीजों को बचाया जा सकता था,व्यवस्था के लापरवाही के कारण मौत हो जा रही है।बात तो हम बड़ी-बड़ी करते है।वेंटीलेटर,डायलिसिस, ई. सी. जी, से दुरुस्त करने का आश्वासन दिया जाता है।परंतु सच्चाई ये है कि मरीज को समय पर  ऑक्सीजन भी उपलब्ध नही कराया जा सक रहा है।
इसी सब का नतीजा है कि 29 जुलाई,2020 को गोमो के एक जवान को सांस लेने में दिक्कत हुई,वह चिल्लाता रह गया।किसी ने उसकी आवाज नही सुनी और वह छटपटा के मर गया।
दूसरा मामला कल 31 जुलाई,2020 का था जब झरिया के एक मरीज द्वारा तकलीफ होने पर ऑक्सीजन लगाने की मांग की गई ।उसने जब ऑक्सीजन लगाने के लिए चिल्लाया तो अप्रशिक्षित वार्ड बॉय ने ऑक्सीजन लगा दिया।थोड़ी देर में ही ऑक्सीजन सिलिंडर का नोजल फट गया,ऑक्सीजन का प्रवाह रुक गया और ऑक्सीजन के अभाव में मरीज मर गया।मैं समझता हूं कि दो ही उदाहरण काफी है अस्पताल की स्थिति को उजागर करने के लिए।जिला खनिज प्राधिकार के मद से नियुक्त स्वीपर को दो माह से वेतन नही मिला है।आखिर स्वीपर काम कैसे करे?जहाँ दूसरे राज्यो में स्वीपर सहित डॉक्टर,नर्स,टेक्निकल स्टाफ,वार्ड बॉय कोविड अस्पताल में सेवा देने के लिए अतिरिक्त सम्मान भुगतान किया जाता है वहीं झारखंड में समय पर वेतन भी आफत है।कैसे बढ़े फ्रंट लाइन कोरोना वॉरियर्स का मनोबल?

केस स्टडी-1
11 जून 2020 टुंडी के बूढ़ासर गांव निवासी 40 वर्षीय प्रवासी मजदूर विनोद बास्की ने खजूर पेड़ पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर लिया ।कारण यह था की मुंबई से लौटने के बाद 14 दिन गांव के आंगनबाड़ी केंद्र में बने क्वॉरेंटाइन सेंटर पर रहा बावजूद उसकी कोविड-19 जांच नहीं हो पाई, इसलिए ग्रामीणों के द्वारा जांच को लेकर दबाव बनाया जाने लगा और उसने आत्महत्या का कदम उठा लिया।
*केस स्टडी-2*
नाम - जीवलाल बास्की
पिता - स्वर्गीय बीरालाल बास्की
कद - 05 फीट, रंग - काला
उम्र - 35 वर्ष
ग्राम - दलुगोडा़
पंचायत - जाताखुंटी
पोस्ट - चरक
थाना - मनियाडीह
प्रखण्ड - टुण्डी
जिला - धनबाद, झारखण्ड का (प्रवासी मजदूर) निवासी है। यह व्यक्ति दिनांक 06/06/2020 से सदर हॉस्पिटल से लापता है। इसे दिनांक 05/06/2020 को सरकार की दिशा निर्देश तथा उनके द्वारा बनाए गए नियम एवं चिकित्सा विभाग के आदेशानुसार सरकारी एम्बुलेंस गाड़ी नंबर JH-10BM 6973 से चालक श्री ललन सिंह के द्वारा जिला सदर अस्पताल धनबाद, कोरोना (Covid-19) स्वाब जाँच कराने हेतु भेजा गया था। जहां से दिनांक 06 /06 /2020 को प्रातः 06:00 बजे पूर्वाह्न तक अंतिम बार देखा गया था। उस समय यह व्यक्ति सफेद चेक (फूल शर्ट) और गहरा नीला (फूल पेंट) पोशाक पहना हुआ था।
                    
कोरोना से प्रभावित परिवारों के प्रति राज्य सरकार का असंवेदनशील रवैया को उपरोक्त दो केस स्टडी उजागर करता है।

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