रविंद्रनाथ टैगोर के पुण्यतिथि पर ऑनलाइन वेबिनार का हुआ आयोजन।

 


रविंद्रनाथ टैगोर के पुण्यतिथि पर ऑनलाइन वेबिनार का हुआ आयोजन।


साहिबगंज:-भारतीय राष्ट्रगान के रचयिता,विश्व विख्यात कवि, साहित्यकार,दार्शनिक और नोबेल पुरस्कार से सम्मानित गुरुदेव  रविंद्र नाथ टैगोर की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि ऑनलाइन वेबिनार के माध्यम से दिया गया।मंच संचालक सह एनएसएस प्रोग्राम अधिकारी डॉ रणजीत कुमार सिंह ने कहा कि कोरोना संकट के महामारी के दौर में हम कुछ न कुछ समाज राष्ट्र को दें तथा देनी की प्रवृति जो भारतीय संस्कृति व परंपरा का मूल आधार है के साथ न्याय करें। आज विश्व कवि रबिन्द्र नाथ टैगोर के पुण्यतिथि पर एनएसएस  साहेबगज महाविद्यालय की ओर से प्राचार्य डॉ विनोद कुमार के मार्गदर्शन में एक वेबीनार का आयोजन किया गया।जिसमें वक्तत डॉ रूपा डॉ धुर्व ज्योति कु सिंह बीएसके महाविद्यालय बरहरवा से महाकान्त झा,धमड़ी कॉलेज से डॉ ज़ेबा अंसारी सहित सभी ने अपनी अपनी बाते रखी। नमिता अनामिका,मो शहबाज आलम,डॉ रंजीत कुमार सिंह,मधुपुर महाविद्यालय के वक्ताओं ने कहा कि गुरुदेव रविंद्र नाथ टैगोर ने भारत एवं बांग्लादेश का राष्ट्रगान तो उन्हीं की कविता पर आधारित है वहीं श्रीलंका का एंथम भी उनकी कविता और रविंद्र संगीत से प्रभावित है।7 अगस्त 1941 को कोलकाता में रविंद्रनाथ टैगोर का निधन हुआ था।हमारा देश का राष्ट्रीय गीत गान उनके द्वारा रचित है बांग्लादेश का एंथम भी उन्हीं का लिखा हुआ है श्रीलंका के राष्ट्रगान के स्वरों में उनका असर है शायद पहले शख्स थे जिन्होंने ऐसे खास उपलब्धि हासिल की है टाइगर के राष्ट्रवाद संबंधी विचारों की जो आज भी भाग कवि कहानीकार गीतकार संगीतकार निबंधकार नाटककार और चित्रकार सभी कर रहे हैं रवीना टैगोर वाकई प्रतिभा के भेजे थे उनका व्यक्तित्व आकर्षक था वह किसी को आकर्षित कर लेते रविंद्र नाथ टैगोर को गुरुदेव भी कहा जाता है बचपन से उनका रुझान कविता और कहानी लिखने की ओर हो चुका था पहली बार कविता 8 साल की उम्र में लिखी थी।1877 में वे 16 साल के थे जब उनकी पहली लघुकथा प्रकाशित हुई थी गुरुदेव उनकी सबसे लोकप्रिय रचिता गीतांजलि के लिए 14 नवम्बर 1913 में नोबेल अवार्ड से सम्मानित किया गया है जो रविंद्र नाथ टैगोर को नाइटहुड की उपाधि मिली थी जिसे टैगोर ने जलियांवाला बाग हत्याकांड 1919 के बाद अपनी लौटा दी थी।1921 में उन्होंने शांति निकेतन की नींव रखी थी और जिसे विश्व भारती यूनिवर्सिटी के नाम से जाना जाता है टाइगर को बाद में गीता दिल्ली का बल हासिल किया।डॉ रूपा ने टैगोर की कविता  एकला   चलो  रे गा के सभी का मन मोह लिया डॉ संतोष ने कहा कि टैगोर मानवता प्रकृति व सभ्यता की झलक उनके रचनाओं में मिलती है।मौके पर दर्जनों एनएसएस स्वयं सेवको के साथ अलग-अलग विश्वविद्यालय से प्रोफेसर और शिक्षक गण मौजूद थे।



No comments