कोरोना महामारी को लेकर सरकारी स्कूल बंद लेकिन सरकार द्वारा बच्चे को मध्यान्ह भोजन को चालू रखने का आदेश जारी है

 

देवघर ब्यूरो रिपोर्ट।देवघर (झारखंड) कोरोना महामारी को लेकर सरकारी स्कूल बंद है लेकिन सरकार द्वारा बच्चों को मध्यान्ह भोजन को चालू रखने का आदेश है। इस मध्याहन भोजन से बच्चों का पेट तो नहीं भर रहे लेकिन स्कूलों के अध्यक्ष और सचिव मालामाल जरूर हो रहे हैं। देवघर प्रखंड के राजकीयकृत उत्क्रमित मध्य विद्यालय  खोरीपानन में पिछले माह मात्र एक बार चावल 1 किलोग्राम से 2 किलोग्राम एवं कुकिंग राशि सौ रुपया 50 रूपया, 70 रूपया  छात्र-छात्राओं में वितरण किया गया है । इससे स्पष्ट होता है कि लॉकडाउन के दौरान स्कूलों के अध्यक्ष एवं सचिव किस कदर बच्चों के पेट पर प्रहार कर मालामाल हो रहे हैं ।इतना ही नहीं प्रखंड संसाधन केंद्र देवघर के मध्याहन भोजन कंप्यूटर ऑपरेटर शिक्षकों के रिपोर्ट को सही ठहराते हुए सरकार को भेजकर गुमराह करने का कार्य कर रहे हैं। स्कूलों में अनाज वितरण एवं कुकिंग राशि का वितरण हो रहा है या नहीं इसकी जांच पड़ताल करना भी शिक्षा विभाग उचित नहीं समझता है। जबकि सरकार के आदेश से लॉकडाउन के दौरान 17 मार्च से 14 अप्रैल तक कक्षा एक से पांच तक को 2 किलोग्राम अनाज एवं113 .60 रुपया कुकिंग चार्ज, 15 अप्रैल से 31 मई तक 3.70किलोग्राम एवं 249 रुपया  एवं 1 जून से 30 जून तक 2.3 किलोग्राम चावल एवं 162.31 रुपया कुकिंग चार्ज देना था । कक्षा 6 से 8 तक के छात्र-छात्राओं को 17 मार्च से 14 अप्रैल तक 3 किलोग्राम चावल 158.20 रुपया कुकिंग चार्ज,15 अप्रैल से 31 मई तक5.55किलोग्राम चॉक्लेव 341.65 रुपया कुकिंग चार्ज देना था। वर्ग6एवं7 को 1 जून से 30 जून तक3.45 किलोग्राम अनाज एवं 219.35 रुपया कुकिंग चार्ज देना था। लेकिन कहीं ऐसा नहीं हुआ है। *क्या कहते हैं अभिभावक और छात्र  राजकीयकृत उत्क्रमित मध्य विद्यालय खोरीपानन के छात्र एवं अभिभावक सोमवार को विद्यालय पहुंचे और अनाज और राशि की मांग की। मौके पर कलीमुद्दीन अंसारी, कारू दास गोपाल दास, खलील मियां, संजय बरनवाल,  अलीमुद्दीन अंसारी सहित अन्य ने बताया कि लोक डाउन के दौरान मात्र एक बार चावल एवं एक बार पैसा वह भी 100- 50 रुपया प्रति छात्र दिया गया है ।दोबारा पैसा मांगने पर कहा जाता है कि सरकार राशि उपलब्ध कराएगी तब दिया जाएगा। वहीं कई बच्चों से रजिस्टर पर हस्ताक्षर भी करा लिया गया है। लेकिन अब तक नहीं दिया गया है। ग्रामीणों ने बताया कि पिछले 2 वर्षों से इस विद्यालय में छात्रवृत्ति एवं साइकिल भी नहीं किया गया है। जबकि विद्यालय के सचिव द्वारा खाता खुलवाने के नाम पर 500 से 700 तक लिया गया है लेकिन खाता अभी तक नहीं दी गई है।

 * क्या कहती है स्कूल की सचिव 

स्कूल की सचिव अरुणा किस्कू ने बताया कि विद्यालय को मासिक पैसा मिलता है जो भी पैसा मिला है उसका वितरण किया गया है । वितरण का रजिस्टर बना हुआ है इसमें सब कुछ लिखा हुआ है।

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