साहेबगंज में गंगा का कटाव अनवरत जारी, जितनागर गाँव के अस्तित्व पर संकट

 


गंगा का कटाव अनवरत जारी, जिससे जितनागर गाँव के अस्तित्व पर संकट




उधवा/साहिबगंज : प्रखण्ड क्षेत्र पूर्वी प्राणपुर के जितनागर का अस्तित्व मिट जाने की आशंका बनी हुई हैं । नदी की कटाव देखते हुए इस बार लगता हैं  कि इस गाँव के नामो-निशान मिट जाएगा। जिससे लोगों में अफ़रा-तफ़री मची हुई हैं । वर्षो से नदी के तट पर बसे जितनागर गाँव के अस्तित्व पर संकट की बादल मंडरा रहे थे । यह गाँव वर्षों से अपनी अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे थे । दियारा क्षेत्र में करीब दो दशक में नदी के कटाव ने गाँव के भौगोलिक दृष्टि को बदल दिया है । इसबार गंगा नदी जितनागर गाँव को निगलने को आतुर हैं । कई दशकों से कई बार कई गाँव के अस्तित्व मिट गया है , इसबार भी उत्तर पलाशगाछी के कई घर गंगा के गर्भ में चला गया है । जिसको लेकर ग्रामीणों ने मिलकर ग्रामीण विकास मंत्री अलंगीर आलम को ज्ञापन सौंपा था ।इसबार भी कई गाँव गंगा के गर्भ में समा जाने की कगार पर है। ग्रामीणों को इस गंभीर समस्या से निजात दिलाने की दिशा में ना तो किसी जनप्रतिनिधि ने ठोस कदम उठाये है और न ही किसी पदाधिकारी ने। हर चुनाव में यहां आने वाले नेताओं ने ग्रामीणों की पीड़ा को बांटने का दिखावा किया। समस्या का समाधान की लोंगो को  उम्मीद भी दिलाया । वही उम्मीद के सहारे लोंगो अपनी आधे से ज्यादा जिंदगी खत्म करदी हैं । बावजूद चुनाव जीतने वाले प्रत्याशी कभी पलट कर जितनागर गाँव की तरफ नहीं देखे । ग्रामीणों को अब बखूबी एहसास हो चुका है कि चुनाव के दौरान आने वाले नेता सिर्फ दिखावे के आंसू बहाते हैं। नदी की विभीषिका करीब 20 वर्षों से ग्रामीणों की नींद हराम किए हुए है। अबतक कटाव से करीब गाँव के हर एक व्यक्ति का  कई एकड़ उपजाऊ भूमि नदी में विलीन हो गई हैं । इससे विकाष मंडल , पिंटू मंडल , सैमोल मंडल , फीटू शेख , इकरामुल शेख , सुबोल घोष , बिरबल मंडल , भीम मंडल , नोकुल मंडल , दिनेश घोष , खगेन घोष , फेकन मंडल , ऐनुल शेख , अलंगीर आलम , पालकु साधु , तेतरू घोष , अभिलाष घोष , टोना रोबिदास , एनामुल सेख , बाबलु शेख आदि को अपकी रोजी-रोटी देने वाली उपजाऊ जमीन से हाथ धोना पड़ा । ग्रामीणों का रोजी रोटी प्राप्त होने का एक मात्र साधन उनका जमीन ही था जो कि गंगा में समाहित हो गया । और ऊपर से महामारी के चलते गाँव के हर व्यक्ति के परिवार में आर्थिक तंगी आ गई हैं । लाचार , असहाय , गरीब ,मजदूर ग्रामीणों ने इस मुसीबतों की घड़ी में उनके पास कोई उपाय न रहने के कारण सबने मिलकर सरकार एवं जिला प्रशासन से बचाव राहत पैकेज की मांग की है । साथ ही गंगा कटाव पीड़ित परिवारों को पुनर्वास नीति के तहत दूसरे सुरक्षित स्थानों में पहुचाने तथा तत्कालीन आर्थिक मदद की गुहार लगाई है ।

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