लिटिल ब्वॉय ने 45 सेकंड मे शहर का 80 फीसदी हिस्सा को राख कर दिया | आनंद


जापान गुरुवार यानि छह अगस्त 2020 को अपने दो शहरों हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम हमले की 75वीं वर्षगांठ मना रहा है। छह अगस्त 1945 को ही सुबह करीब आठ बजे हिरोशिमा पर परमाणु बम का हमला हुआ। ये हमला इतना जबरदस्त था कि इसकी वजह से कुछ ही पल में 80 हजार से ज्यादा लोगों को मौत हुई थी।

हिरोशिमा में हुए परमाणु बम हमले से जापान उबरा भी नहीं था कि तीन दिन बाद 9 अगस्त को दूसरे शहर नागासाकी में दूसरा परमाणु बम हमला हो गया। इस दिन सुबह के करीब 11 बजे शहर के उपर परमाणु बम गिराया गया। इस हमले में 40 हजार से ज्यादा लोगों की जानें चली गई थी। विस्फोट के बाद रेडियोएक्टिव विकिरण के संपर्क में आने और विस्फोटों के बाद हुई ‘काली बारिश’ से भी दोनों शहरों में हज़ारों लोगों की मौत हो गई थी।

एक मिनट के भीतर हिरोशिमा का 80 फीसदी हिस्सा हो गया था राख
अमेरिकी वायु सेना ने छह अगस्त की सुबह जिस परमाणु बम को शहर के उपर गिराया था उसका नाम था लिटिल ब्वॉय जबकि नागासाकी के उपर जिस परमाणु बम को गिराया था उसका नाम दिया था फैट मैन। हिरोशिमा में सुबह के करीब 8.15 बजे गिराया गए परमाणु बम से ऐसा धमाका हुआ था कि 43 सेकेंड के भीतर ही शहर का 80 फीसदी हिस्सा राख बनकर हवा में उड़ गया था। हिरोशिमा पर किया गया परमाणु हमला दरअसल 1941 को अमेरिका के नौसैनिक बेस पर्ल हार्बर पर किए गए जापानी सेना के द्वारा हमले का बदला था।

परमाणु विस्फोट के बाद जीवित बचे 84 लोगों को पीड़ित के रूप में मिली मान्यता
हाल ही में हिरोशिमा की एक जिलला अदालत ने परमाणु विस्फोट के बाद हुई ‘काली बारिश’ से जीवित बचे 84 लोगों को पीड़ितों के रूप में मान्यता दे दी है। अब ये सभी लोग परमाणु विस्फोट के पीड़ितों के रूप में उपलब्ध निःशुल्क चिकित्सीय सुविधा का लाभ उठा सकते हैं।

‘काली बारिश’ क्या है?
इस परमाणु हमले से नष्ट हुई इमारतों का मलबा और कालिख, बम से निकले रेडियोधर्मी पदार्थ के साथ मिलकर वातावरण में एक मशरूम रूपी बादल के रूप में प्रकट हुआ था। ये पदार्थ वायुमंडल में वाष्प के साथ संयुक्त हो गए जिसके बाद काले रंग की बूंदें धरती पर गिरने लगी जिसे ‘काली बारिश’ कहा गया।


‘काली बारिश’ से बचे लोगों ने इसे बारिश की बड़ी-बड़ी बूंदों के रूप में वर्णित किया जो सामान्य बारिश की बूंदों की तुलना में बहुत भारी थी। इस घटना में जीवित बचे लोगों के अनुसार, घटना के शिकार हुए बहुत से लोगों के शरीर की खाल जल गई और लोग गंभीर रूप से निर्जलित (Dehydrated) हो गए।

काली बारिश का क्या हुआ था प्रभाव?
काली बारिश, अत्यधिक रेडियोधर्मी पदार्थ से युक्त थी, इस संबंध में हुए अध्ययनों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस बारिश के संपर्क में आने से कई प्रकार की गंभीर बीमारियां हो गईं थीं। वर्ष 1945 में किए गए एक अध्ययन से पता चलता है कि ग्राउंड जीरो से तकरीबन 29 किलोमीटर के क्षेत्र में काली बारिश हुई। इस बारिश ने अपने संपर्क में आने वाली सभी चीजों को दूषित कर दिया।

काली बारिश ने कई लोगों में विकिरण के तीव्र लक्षण (Acute Radiation Symptoms-ARS) उत्पन्न किए। कुछ लोग कैंसर से ग्रस्त हो गए तो कुछ लोगों की आंखों की रोशनी चली गई। शहर की जमीन और पानी भी विकिरण से दूषित हो गया था।

नागासाकी पर गिराया गया बम ज्यादा शक्तिशाली था
नागासाकी पर गिराया गया बम हिरोशिमा पर गिराए गए बम से अधिक शक्तिशाली था, लेकिन इससे कम लोगों की मौत हुई और शहर की भौगोलिक स्थिति के कारण इसका प्रभाव एक छोटे से क्षेत्र तक ही सीमित रहा। इसका मतलब यह था कि हिरोशिमा की तुलना में नागासाकी में काली बारिश के लिए आवश्यक रेडियोएक्टिव सामग्री कम थी, यही कारण था कि यहां अपेक्षाकृत छोटे से क्षेत्र में ही बारिश सीमित थी।

परमाणु हमले के लिए जापान को ही क्यों चुना गया?
द्वितीय विश्वयुद्ध में जापान जर्मनी का साथ दे रहा था। जर्मनी ने मई 1945 में ही समर्पण कर दिया था। जुलाई 1945 में अमेरिकी राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन, ब्रिटिश प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल और सोवियत नेता जोसेफ स्टालिन युद्ध के बाद की स्थिति पर विचार करने के लिए जर्मनी के शहर पोट्सडम में मिले, इसका एक कारण यह था कि अभी तक प्रशांत क्षेत्र में युद्ध समाप्त नहीं हुआ था। जापान अभी भी मित्र देशों के सामने समर्पण करने के लिए तैयार नहीं था।

पोट्सडम में ही अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रूमैन को यह जानकारी मिली कि न्यू मेक्सिको में परमाणु बम का परीक्षण सफल रहा है। पोट्सडम में ही ट्रूमैन और चर्चिल के बीच इस बात पर सहमति बनी कि यदि जापान तत्काल बिना किसी शर्त के समर्पण करने के लिये तैयार नहीं होता तो उसके खिलाफ परमाणु बम का इस्तेमाल किया जाएगा।

जापान के समर्पण नहीं करने के कारण एक अगस्त 1945 को जापान के शहर हिरोशिमा पर परमाणु हमले की तारीख तय की गई। लेकिन तूफान के कारण इस दिन हमले को रोकना पड़ा, इसके पांच दिन बाद यह हमला किया गया।

हिरोशिमा के बाद नागासाकी पर हमला क्यों किया गया?
हिरोशिमा पर हुए हमले के बावजूद जापान समर्पण के लिए तैयार नहीं हुआ। इसलिए तीन दिन बाद अमेरिका ने नागासाकी पर दूसरा परमाणु बम गिराया। पहले हमले के लिये क्योटो को चुना गया था, लेकिन अमेरिकी रक्षा मंत्री की आपत्ति के बाद नागासाकी शहर को चुना गया। फैट मैन नामक बम 22,000 टन टीएनटी की शक्ति के साथ नागासाकी पर गिराया गया।
नागासाकी पर परमाणु हमले के एक दिन बाद जापान के सम्राट हीरोहीतो ने अपने कमांडरों को देश की संप्रभुता की रक्षा की शर्त पर मित्र देशों की सेना के सामने समर्पण करने का आदेश दे दिया। मित्र देशों ने शर्त मानने से इंकार कर दिया और हमले जारी रखे। उसके बाद 14 अगस्त को एक रेडियो भाषण में सम्राट हीरोहीतो ने प्रतिद्वंद्वियों के पास ‘अमानवीय’ हथियार होने की दलील देकर बिना किसी शर्त के ही समर्पण करने की घोषणा कर दी।

अभिजीत आनंद
     स्तंभकार
  लेखक/कवि
महाविद्या द्वारा सम्मानित
  सह राष्ट्रीय खिलाड़ी

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