उधवा में जलजमाव से लाचार ग्रामीण, कुम्भकर्णीय नींद में सोये जनप्रतिनिधि व प्रशासन



जलजमाव से गाँव का टूटा संपर्क ,ग्रामीण लाचार 


उधवा/साहिबगंज : बारिश के मौसम आते ही पश्चिम प्राणपुर में जलजमाव की समस्या का सामना करने के लिए आम लोग  मजबूर हो गए है , ऐसे सैकड़ों जगहों की स्थिति काफ़ी दयनीय हैं ।  हल्के-फुल्के बारिश में ही  इन जगहों पर महीनों तक जलजमाव लगा रहता हैं । जलजमाव अधिक दिनों तक रहने से पानी गंदे हो  जाते हैं , जिससे  दुर्गंध आने लगता और मच्छरों की उत्पत्ति भी होती हैं । बारिश से कई स्थानों पर जलजमाव, कीचड़ व गंदगी से पैदा होने वाले मच्छर व बैक्टीरिया बीमारियां फैलाते हैं। जिससे लोगों को डर सता रहा हैं । ऐसे ही एक स्थिति प्रकाश में आया हैं जो पंचायत के अलाउद्दीन टोला के प्रवेश द्वार में महीनों तक जलजमाव रहता हैं । गाँव के प्रवेश द्वार में ही लगभग 3 / 4 फिट पानी महीनों तक जमा रहता हैं । ग्रामीण नूर आलम,  एजाबुल शेख , सनाउल सेख सहित ग्रामीणों  का कहना है कि इस जलजमाव की स्थिति से वे लोग कई वर्षों से जूझ रहे हैं । जिसके बहाव का कोई विकल्प नहीं होने से ग्रामीणों को डर सता रहा हैं , कही उनके बच्चें इस जलजमाव की वजह से इसमें डूब न  जाए । साथ ही उनका यह  भी कहना है कि कई दिन यहाँ बच्चे डूबते-डूबते बचे हैं । गाँव के प्रवेश द्वार होने के कारण किसी न किसी व्यक्ति की नजर इस ओर पड़ जाती और बच्चे को बचा लिया जाता हैं । ऐसी ही स्थिति अगर बना रहा तो एकदिन बड़ा हादसा होने से इनकार नहीं किया जा सकता हैं । इस गाँव में सरकारी विद्यालय अवस्थित हैं ,  यु पी एस अलाउद्दीन टोला । देश मे लॉकडाउन से पहले बच्चे पढ़ने के लिए जाया करते थे जहाँ बच्चों को जान  जोख़िम में उठाना पड़ता था कई बच्चों को उनके अभिभावक  कंधे पर उठाके स्कूल में पहुचाया करते थे । लेकिन अब देश में लॉकडाउन की  वज़ह से सभी स्कूले बंद रहने के कारण अभिभावकों को ऐसी हालत से निजात मिला है , लेकिन जलजमाव अभी भी जस की तस बनी हुई हैं ।  साथ ही अभी के दौर में कोरोना महामारी के चलते सरकारी सह निजी स्कूलों को बंद रखा गया है । यह आश्चर्यचकित करने वाली बात है कि  यह गाँव में प्रवेश करने के लिए सायद कुछ दिन बाद नाव की जरुरत पड़ेगी । लोग जलजमाव की समस्या से मुक्ति दिलाने की मांग जनप्रतिनिधियों और पदाधिकारियों से कर रहे हैं , बावजूद जनप्रतिनिधि बेपरवाह हैं प्रशासन मौन हैं जनता लाचार हैं 

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