याद किए गए क्रांतिकारी जनकवि हरीश भदानी को



मधुपुर 11 जून स्थानीय राहुल अध्ययन केन्द्र में क्रांतिकारी शायर व जनकवि हरीश भादानी जयन्ती के अवसर पर याद किये गये! दोनो विभूतियों की तस्वीर पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किया गया! मौके पर केन्द्र के संरक्षक व जनवादी चिंतक धनंजय प्रसाद ने दोनो विभूतियों के जीवन पर विस्तार पूर्वक प्रकाश डाला!  उन्होने कहा कि क्रांतिकारी राम प्रसाद विस्मिल स्वतंत्रता सैनानी के साथ -साथ एक संवेदनशील कवि , शायर व इतिहासकार के साथ बहुभासी अनुवादक भी थे!  विस्मिल अपने तीस वर्षों की जीवन में उनकी ग्यारह पुस्तकें प्रकाशित हुई थी!  जिसे अंग्रेजी हुकूमत द्वारा जप्त कर ली गई!  वे किताब बेचकर अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ लड़ने के लिए हथियार खरीदे! क्रांतिकारिता का सपना साकार करने के लिए चन्द्रशेखर आजाद के नेतृत्व वाले हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन में शामिल कर 9 अग्रस्त 1925 को साथियों के साथ मिलकर कांकोरी काँड को अंजाम दिये थे!26 सितम्बर 1925 को पकड़े गये और लखनऊ सेंट्ल जेल में रखा गया! जहाँ उन्हें अशफ्फाकउल्राह खान , राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी और रौशन के साथ फाँसी की सजा सुना दी गई!  विस्मिल की शायरी उन दिनों क्रांतिकारियों की प्रेरणा गीत हुआ करती थी और आज भी है! उन्होने उनकी एक शेर सुनाया! सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है! देखना है जोर कितना बाजूँ -ए - कातिल में है!


मधुपुर से मोहम्मद असलम की रिपोर्ट।

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