जूम ऐप के माध्यम से झारखंड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ का कॉन्फ्रेंस बैठक आयोजित किया गया जिस का संचालन पलामू जिला अध्यक्ष विकास पांडे ने किया


देवघर ब्यूरो रिपोर्ट।सुशील कुमार पांडेय केंद्रीय संजयुक्त सचिव, अनुबंध कर्मचारी महासंघ ने कहा कि, राज्य के अधिकारी राज्य सरकार को मनरेगा के बारे में काफी गुमराह कर रहे हैं। पिछले दिनों मनरेगा कर्मियों द्वारा एनजीओ के माध्यम से सामाजिक अंकेक्षण कराए जाने का विरोध किए जाने के प्रतिशोध में, चतरा, गिरिडीह, पाकुड़ एवं अन्य जिले के मनरेगा साथियों को, गलत इरादे से टारगेट करके बेवजह बर्खास्त किया जा रहा है। साथ ही मनरेगा को डिमांड आधारित योजना के बजाय, लक्ष्य आधारित योजना बनाकर, प्रत्येक पंचायत में 250 से अधिक मजदूर नियोजित करने का अनुचित दबाव अधिकारियों द्वारा मनरेगा कर्मियों पर बनाया जा रहा है। ग्रामसभा द्वारा चयनित योजनाओं को अमान्य घोषित कर गांव की प्रकृति एवं आवश्यकताओं की अनदेखी करते हुए, मनमाने ढंग से पूरे राज्य में एक ही तरह की योजनाओं के क्रियान्वयन का दबाव मनरेगा कर्मियों पर बनाया जा रहा है। जिससे एक तरफ मनरेगा अधिनियम की धज्जियां उड़ रही हैं, वहीं ग्राम सभा में के भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। क्योंकि वास्तव में गांव की जो आवश्यकताएं हैं उसके इतर अन्य योजनाओं को गांव के लोग स्वीकार नहीं करना चाहते हैं। उनका कहना है कि जो योजनाएं ग्राम सभा द्वारा चयनित है उसी का क्रियान्वयन हो। ऐसी स्थिति में मनरेगा कर्मियों पर काफी दबाव है और काम करना मुश्किल हो रहा है। जिसकी वजह से आए दिन हादसे में मनरेगा कर्मियों की या तो मृत्यु हो रही है या वे दुर्घटना के कारण अपाहिज हो रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार द्वारा अभी तक मृतक अथवा घायल मनरेगा कर्मियों के परिवार को आर्थिक सहायता का कोई प्रावधान नहीं किया गया है। इस प्रकार का दबाव असहनीय है  तथा हमलोगों ने, मनरेगा योजना तथा मनरेगा कर्मियों के अस्तित्व की लड़ाई के लिए कमर कस लिया है।

प्रदेश महासचिव मो० इमतेयाज  ने कहा कि संघ की ओर से प्रदेश स्तर का एक दल चतरा में हुए बर्खास्तगी के विषय में वस्तु स्थिति की जानकारी लेने गया था। जिसमें पता चला कि जी 40 सड़क की योजना गायब होने की बात कही जा रही है वो सरासर गलत आरोप है बल्कि सच्चाई ये है कि प्रतापपुर प्रखंड में कुछ 40 सड़क की योजनाओ का क्रियान्वयन हुआ ही नही है जिन योजनाओ में कार्य हुआ वो आज भी धरातल पर मौजूद है । जब पक्की सड़क का दो तीन वर्षों में स्थिति जर्जर हो जाती है तो मिट्टी की सड़क का चार पांच वर्षों के बाद जांच कर केवल अनुबंध मनरेगा कर्मियों को बर्खास्त करने कितना उचित है? उसी तरह 5 वर्ष बाद तालाब की योजना में जांचकर्ताओं को मशीन से हुए कार्य का पता कैसे चला ?गिरिडीह पाकुड़ एवं अन्य जिलों में भी मनरेगा कर्मियों पर बेवजह बर्खास्तगी की कार्रवाई हुई है, इन सब बातों से यह प्रतीत होता है कि जानबूझ कर अधिकारियों के द्वारा केवल मनरेगा कर्मियों को बर्खास्त करने के लिए इस तरह के कार्य किये जा रहे है। कोरोना के इस संकट की घड़ी में में एक और जहां मनरेगा पूरे राज्यं में प्रवासी मजदूरों सहित लाखो लोगो के लिए रोजगार सृजन का कार्य कर रही है वही दूसरी तरफ अधिकारियों द्वारा गलत तरीके से मनरेगा कर्मियों को बर्खास्त , FIR आदि करके पूरे राज्य के कर्मियों को उग्र आंदोलन एवम अनिश्चित कालीन हड़ताल करने के लिए उकसा रही जिसे मनरेगा कर्मी बर्दाश्त नहीं करेंगे। राज्य भर में मनरेगा कर्मी काफी आक्रोशित हैं तथा आंदोलन के लिए मन बना लिए है।

प्रदेश सचिव जॉन पीटर बागे ने बताया कि संघ का प्रतिनिधिमंडल अगले दो दिनों में माननीय मुख्यमंत्री एवं माननीय ग्रामीण विकास मंत्री से मुलाकात कर चतरा, गिरिडीह एवं अन्य जिलों में हुए बेवजह बर्खास्तगी के विषय में विस्तार से अवगत कराते हुए, अधिकारियों के काले कारनामे को बताएगी तथा वर्तमान समय में अत्यधिक मजदूर नियोजन एवं योजनाओं को जबरदस्ती थोपने की वजह से, मनरेगा कर्मियों पर बढ़े दबाव के लिए भी सरकार को लिखित चेतावनी दिया जाएगा। अगर एक सप्ताह के भीतर हमारी मांगों पर विचार नहीं किया गया, तो राज्य भर में  मनरेगा कर्मी आंदोलन के लिए विवश होंगे तथा पूरे राज्य में मनरेगा के कार्य को ठप्प कर दिया जाएगा।

कॉन्फ्रेंस मीटिंग में मुख्य रूप से अनुबंध कर्मचारी महासंघ के केंद्रीय सचिव सुशील पाण्डेय, डॉ राजेश कुमार दास,  देवेन्द्र उपाध्याय, उदय प्रसाद, नन्हे परवेज, पंकज सिंह, मुकेश राम, मिराज-उल हक, जयदेव मुर्मू, नरेश प्रसाद सिन्हा, जीतेन्द्र सिंह, महेश सोरेन, विकास महतो, विनोद विश्वकर्मा, विश्वनाथ भगत, पुरुषोत्तम गोप, आलोक तिवारी, व्यास यादव, , सत्यम सिंह एवं नीरज सिंह सहित सभी जिलाध्यक्ष एवं प्रदेश कमेटी के मेंबर मौजूद थे।

No comments