टीडी दलों के हमले से कृषि विभाग अलर्ट


साहिबगंज:--झारखंड में टिड्डी दलों के हमले से फसल के नुकसान की आशंका को देखते हुए जिला कृषि विभाग अलर्ट।उपविकास आयुक्त श्री मनोहर मरांडी ने टिड्डी दलों के हमले की आशंका को लेकर कृषि पदाधिकारी व कृषि विभाग को अतिरिक्ति सतर्कता बरतते हुए एक्टिव रहने का निर्देश दिया।उनके द्वारा टिड्डी दलों से बचाव व जरूरी किटनाशकों की जानकारियों से अवगत कराया गया।उनके अनुसार कृषक इससे जुड़ी जानकारी हेतु किसान काॅल सेंटर या जिला कृषि पदाधिकारी से संपर्क कर सकते है।इसके अलावे उन्होंने इसके बढ़ते प्रकोप को देखते हुए इसकी लगातार निगरानी करने का निर्देश भी  संबंधित अधिकारियों को दिया है। साथ हीं कृषि वैज्ञानिक केन्द्र के वैज्ञानिक व अधिकारियों को आपसी समन्वय स्थापित करते हुए इससे निपटने को लेेकर आवश्यक व उचित दिशा-निर्देश दिया है।
इन रसायनों का कर सकते है छिड़काव:
फसलों में यदि टिड्डियों को प्रकोप बढ़ गया हो तो कीटनाशक दवाइयों का छिड़काव करके भी इनकों मारा जा सकता है। टिड्डी प्रबंधन हेतु फसलों पर नीम के बीजों का पाउडर बनाकर 40 ग्राम पाउडर प्रति लीटर पानी में घोल कर उसका छिड़काव किया जाय तो दो-तीन सप्ताह तक फसल सुरक्षित रहती है।इसके अलावा बेन्डियोकार्ब 80 प्रतिशत 125 ग्राम या क्लोरपाइरीफास 20 प्रतिशत ईसी 1200 मिली या क्लोरपाइरीफास 50प्रतिशत ईसी 480 मिली या डेल्टामेथरिन 2.8प्रतिशत ईसी 625 मिली या डेल्टामेथरिन 1.25प्रतिशत एससी 1400 मिली या डाईफ्लूबेनज्यूरॉन 25 प्रतिशत डब्ल्यूपी 120 ग्राम या लैम्ब्डा-साईहेलोथ्रिन 5 प्रतिशत ईसी 400 मिली या लैम्बडा-साईहेलोथ्रिन 10 प्रतिशत डब्ल्यूपी 200 ग्राम को 500-600लीटर पानी मे घोल कर प्रति हैक्टेयर अर्थात 2.5 एकड़  खेत मे छिड़काव करना चाहिए।
आखिर क्या है टिड्डी और कैसे पहुँचाते है नुकसान:
टिड्डी दो से ढाई इंच लम्बा कीट होता है। यह डरपोक होने के कारण समूह में रहते हैं। टिड्डी दल किसानों का सबसे बड़ा शत्रु है। यह एक दिन में 100 से 150 किलोमीटर की दूरी तय कर सकती हैं। झुंड में यह पेड़-पौधे एवं वनस्पतियों को नुकसान पहुंचाते हैं। यह दल 15 से 20 मिनट में फसल के पत्तियों को पूर्ण रूप से खाकर नष्ट कर सकते हैं। टिड्डी दल किसी क्षेत्र में शाम छह से आठ बजे के आस-पास पहुंचकर जमीन पर बैठ जाते हैं। या फिर पेड़ों, झाडियों एवं फसलों पर बसेरा करते हैं। वहीं पर रात गुजारते हैं तथा फसल को खाकर नुकसान पहुंचाते। फिर सुबह आठ से नौ बजे के करीब उड़ान भरते हैं।इसके अलावे इनसे जुड़ी किसी प्रकार की जानकारी एवं सहायता के लिए किसान कॉल सेंटर टोल फ्री नंबर -18001801551 या जिला कृषि पदाधिकारी, साहिबगंज श्री उमेश तिर्की, मोबाइल नंबर 9430357752 पर काॅल करके जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। 

टिड्डी दल से अपने खेत को बचाने के कारगर तरीके।
खेतों में एक साथ मिलकर आग जलाकर पटाखे फोड़ें:
 बलुई मिट्टी वाले खेत टिड्डी दल की पसंद हैं। ये हमेशा बलुई मिट्टी में अंडे देता है, ऐसे में इन खेतों को खाली न रहने दें, जोत दें।:
 खेतों में पानी भर दें, जिससे प्रजनन और अंडे देने की कोई गुंजाइश न रहे।:
 थाली-खाली टिन को जोर से पीटें, ढोल नगाड़े बजाकर तेज आवाज करें, इससे भी ये कीट भाग जाता है।:
 टिड्डियों का दल आवाज के कंपन को महसूस करता है। इस कारण आजकल इन्हें भगाने के लिए डीजे का भी प्रयोग किया जाने लगा है। यह आवाज को दूर से भांपकर अपना रास्ता बदल लेते हैं अथवा खेतों से उडकर दूर चले जाते हैं।:
इसके अलावा फसलों को टिड्डी दल के हमले से बचाने के लिए हेस्टाबीटामिल, क्लोरफाइलीफास और बेंजीएक्सटाक्लोराइड का खेतों में छिडकाव करना चाहिए।:
खाली पड़े खेतों में टिड्डी दल अंडे देता है। जिन्हें नष्ट करने के लिए खेतों में गहरी खुदाई की जानी चाहिए और फिर इनमें पानी भर देना चाहिए।:
 बैठक के दौरान जिला सहकारिता पदाधिकारी शिव नारायण राम, जिला कृषि पदाधिकारी उमेश तिर्की, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी विकास कुमार हेम्ब्रम, कृषि वैज्ञानिक सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।

साहिबगंज से देव आर्यन की रिपोर्ट।

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