उप विकास आयुक्त ने टिड्डी दलों के हमले की आशंका को लेकर कृषि पदाधिकारी व कृषि विभाग को सतर्कता बरतने का दिया निर्देश


देवघर ब्यूरो रिपोर्ट।उप विकास आयुक्त  शैलेन्द्र कुमार लाल की अध्यक्षता में टिड्डी दल के हमलें की आशंका को लेकर विकास भवन सभागार में बैठक का आयोजन किया गया। इस दौरान उन्होंने कृषि पदाधिकारी को अतिरिक्त सतर्कता बरतते हुए पूर्ण रूप से एक्टिव रहने का निर्देश दिया है। साथ हीं इसके बढ़ते प्रकोप को देखते हुए इसकी लगातार निगरानी करने का निर्देश भी  संबंधित अधिकारियों को दिया है। इसके अलावा बैठक के दौरान उन्होंने कृषि वैज्ञानिक केन्द्र, सुजानी के वैज्ञानिकों व अधिकारियों को आपसी समन्वय स्थापित करते हुए इससे निपटने को लेेकर आवश्यक व उचित दिशा-निर्देश दिया है। साथ ही संबंधित अधिकारियों को उन्होंने निदेशित किया कि टिड्डी दल के हमले को रोकने के उद्देश्य से इससे जुड़ी तैयारियों के पुख्ता इंतजाम पूर्व से हीं कर के रखे, ताकि किसानों के फसलों को किसी प्रकारके हानि न पहुंचे।
*■ खेतों में टिड्डी दल के हमलें को रोकने हेतु यह करें उपायः उप विकास आयुक्त....*
बैठक के दौरान उप विकास आयुक्त द्वारा जानकारी दी गयी कि टिड्डी दल के हमले से बचने के लिए खेतों में धुआं किया जाए। इससे टिड्डी रुकता नहीं है। खेत में पानी भरने से भी टिड्डी बैठ नहीं पाती। सुबह पांच बजे से आठ बजे के बीच कलोरपाईरीफोस 20 प्रतिशत ई०सी० या लम्बडा, साईहसोथरीन पांच प्रतिशत ईसी के छिड़काव भी किया जा सकता है। इसके अलावा किसान सामूहिक रूप से गांव व क्षेत्र में ध्वनि विस्तारक यंत्रों का प्रयोग कर भगा सकते हैं। साथ हीं आग जलाने, पटाखे फोडने, थाली, टीन पीटने, ढोल व नगाड़े बजाने से भी ये भाग जाते हैं। तेज ध्वनि को ये कीट बर्दाश्त नहीं कर पाते।
*■ इन रसायनों का कर सकते है छिड़काव....*
फसलों में यदि टिड्डियों को प्रकोप बढ़ गया हो तो कीटनाशक दवाइयों का छिड़काव करके भी इनकों मारा जा सकता है। टिड्डी प्रबंधन हेतु फसलों पर नीम के बीजों का पाउडर बनाकर 40 ग्राम पाउडर प्रति लीटर पानी में घोल कर उसका छिड़काव किया जाय तो दो-तीन सप्ताह तक फसल सुरक्षित रहती है।
 इसके अलावा बेन्डियोकार्ब 80 प्रतिशत 125 ग्राम या क्लोरपाइरीफास 20 प्रतिशत ईसी 1200 मिली या क्लोरपाइरीफास 50 प्रतिशत ईसी 480 मिली या डेल्टामेथरिन 2.8 प्रतिशत ईसी 625 मिली या डेल्टामेथरिन 1.25 प्रतिशत एससी 1400 मिली या डाईफ्लूबेनज्यूरॉन 25 प्रतिशत डब्ल्यूपी 120 ग्राम या लैम्ब्डा-साईहेलोथ्रिन 5 प्रतिशत ईसी 400 मिली या लैम्ब्डा-साईहेलोथ्रिन 10 प्रतिशत डब्ल्यूपी 200 ग्राम को 500-600 लीटर पानी मे घोल कर प्रति हैक्टेयर अर्थात 2.5 एकड़  खेत मे छिड़काव करना होगा।
 *■ जानकारी व सहायता के लिए किसान काॅल सेंटर के अलावा निम्नलिखित नंबरों पर काॅल कर सकते हैं-*
इसके अलावे इनसे जुड़ी किसी प्रकार की जानकारी एवं सहायता के लिए किसान कॉल सेंटर टोल फ्री नंबर - 18001801551 या जिला कृषि पदाधिकारी, देवघर  रामा शंकर प्रसाद सिंह मोबाइल नंबर 9431427940 पर काॅल करके जानकारी प्राप्त कर सकते है। साथ हीं वरीय वैज्ञानिक सह प्रधान कृषि विज्ञान केन्द्र, सुजानी, देवघर 9430320305 के अलावा पौध संरक्षण निरीक्षक मनीष कुमार 9431320284 पर सम्पर्क कर जानकारी प्राप्त कर सकते है। 
*■ ज्ञात हो कि उपायुक्त नैन्सी सहाय के निर्देशानुसार जिला स्तर पर टिड्डी नियंत्रण कार्यदल का गठन किया गया है। जो कि उप विकास आयुक्त की अध्यक्षता में होगी, जिसकी संरचना निम्नवत है-*
1. उप विकास आयुक्त-अध्यक्ष
2. जिला कृषि पदाधिकारी-संयोजक
3. वन प्रमंडल पदाधिकारी-सदस्य
4. जिला परिवहन पदाधिकारी-सदस्य
5. जिला उद्यान पदाधिकारी-सदस्य
6. जिला स्तरीय अग्नि शमन विभाग के पदाधिकारी-सदस्य
7. जिला जनसम्पर्क पदाधिकारी-सदस्य
8. कनीय पौधा संरक्षण पदाधिकारी-सदस्य
9. कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक-सदस्य
*बैठक के दौरान उपरोक्त के अलावे* कृषि पदाधिकारी श्री रामा शंकर सिंह, जिला जनसम्पर्क पदाधिकारी रवि कुमार, वन प्रमंडल पदाधिकारी, कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक, जिला उद्यान पदाधिकारी-सदस्य, जिला स्तरीय अग्नि शमन विभाग के पदाधिकारी आदि उपस्थित थें।

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