टूटी फूटी झोपड़ी में परिवार के साथ गुजर बसर करने को मजबूर


दुमका   शिकारीपाड़ा प्रखंड के जोगिखोफ गांव में राज्य को सर्मशार कर देने वाली का एक मामला प्रकाश में आया है। एक तरफ मोदी सरकार ने pm आवास से लेकर कई बड़ी योजनाओं का दावा करते हुए आ रही है।ताकि कोई भी व्यक्ति बेघर न रहे ।वही दूसरी ओर इस योजनाओं का लाभ धरातल पर देखने नही मिल रहा है। मामला शिकारीपाड़ा प्रखंड के जोगिखोफ गांव में रहने वाले मैजूदीन अंसारी का है। जो आज भी बेघर है ।एक टूटी फूटी झोपड़ी है।उसी में वो अपने परिवार के साथ गुजर बसर करने को बेबस है। साथ ही बरसात के दिनों में दूसरों के घरों पर रहना पड़ता है। बड़ी मुश्किल से दो वक्त की रोटी जुट पाती है।कभी कभी भूखे पेट भी सो जाना पड़ता है। इन्होंने मुखिया से लेकर प्रखंड विकास पदाधिकारी तक सभी का दरवाजा खटखटाया लेकिन इस बेघर मजदूर की बात को कोई सुनने वाला नही मिला।यहां के पंचायत समिति सदस्य फादर अंसारी का कहना है।कि मैंने भी इस मामले को लेकर पदाधिकारयों का ध्यान आकृष्ट कराया लेकिन हमारी इन बातों को नजरअंदाज किया गया। किसी पदाधिकारी ने नही सुना।साथ ही इस गरीब मजदूर का कहना है की बारिश के दिनों में हम पूरे परिवार सहित सोते नही है।पूरा घर पर पानी भर जाता है।और उसी हालत में रात गुजारते है।

दुमका शिकारीपाड़ा से राजा की रिपोर्ट।

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